खबर शहर , थाने का चक्कर खत्म: अब घायल सीधे अस्पताल पहुंचेगा, डिजिटल होगी मजरूबी चिट्ठी; सर्कुलर हुआ जारी – INA

किसी वारदात या मारपीट में घायल व्यक्ति को अब मेडिकल के लिए थाने का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। अब उनकी मजरूबी चिट्ठी डिजिटल रूप में जिला अस्पताल, सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर ऑनलाइन पहुंच जाएगी। इससे दस्तावेज संबंधित थाने, विभाग और कोर्ट में आसानी से देखे भी जा सकेंगे। इसमें किसी तरह की छेड़छाड़ और हैंडराइटिंग की गड़बड़ी भी नहीं होगी।
इसके साथ ही पोस्टमॉर्टम और पंचनामा की कार्रवाई को भी ऑनलाइन किया जा रहा है। कमिश्नरेट के 45 थानों के लिए इसका सर्कुलर जारी कर दिया गया है। पोर्टल में हर थाने की यूजर आईडी बनाई गई है। जहां पोर्टल संचालित करने में समस्या आ रही है, उसके लिए पुलिस अधिकारियों ने स्वास्थ्य विभाग से पत्राचार किया है।
कई बार वारदात या झगड़े में घायल को मेडिकल के लिए थाने का चक्कर लगाना पड़ता है। उन्हें पुलिसकर्मी मजरूबी चिट्ठी के साथ मेडिकल के लिए लेकर जाते हैं और वापस रिपोर्ट लेकर ही आ पाते हैं। ऑनलाइन प्रक्रिया में यह आसान हो जाएगा। घायल को थाने नहीं आना होगा। पुलिस को घटना की सूचना देने पर वो सीधे अस्पताल में मेडिकल के लिए पहुंच सकेंगे।
डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास ने बताया कि इस पोर्टल का सीधा फायदा आम लोगों को होगा। थाने से मजरूबी चिट्ठी मिलने- न मिलने का विवाद भी खत्म हो जाएगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी इसी पोर्टल के माध्यम से जल्द मिलने लगेगी। कुछ थानों में पोर्टल के माध्यम से काम शुरू हो गया है।
क्या है पोर्टल
डीसीपी सिटी ने बताया कि सरकार का मेडलीपर पोर्टल एक सेंट्रलाइज्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसका पूरा नाम मेडिको लीगल एग्जामिनेशन एंड पोस्टमॉर्टम रिपोर्टिंग सिस्टम है। इसे नेशनल इन्फॉरमेटिक्स सेंटर (एनआईसी) की ओर से गृह मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निर्देश पर विकसित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य पोस्टमार्टम (पीएमआर) और मेडिको-लीगल मामलों (एमएलसी) की रिपोर्टिंग प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल, पारदर्शी और त्वरित बनाना है।
क्या होती है मजरूबी चिट्ठी
मजरूबी चिट्ठी (या चिट्ठी मजरूबी) एक आधिकारिक पुलिस पत्र होता है जो किसी घायल व्यक्ति की चिकित्सीय जांच (मेडिकल एग्जामिनेशन) के लिए थाने से अस्पताल भेजा जाता है।
यह होगा फायदा
– डॉक्टर पोस्टमॉर्टम या मेडिको-लीगल जांच के दौरान सीधे पोर्टल पर उपलब्ध मानकीकृत फॉर्मेट में रिपोर्ट टाइप करेंगे। इससे डॉक्टरों की अस्पष्ट लिखावट के कारण होने वाली परेशानियां दूर हो जाएंगी।
– कागजी कार्रवाई और मैनुअल समन्वय में होने वाली देरी समाप्त हो जाएगी। रिपोर्ट मिनटों में अधिकृत विभागों (पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और अदालतों) में भी देखी जा सकेगी।
– रिपोर्ट में किसी भी प्रकार की हेरफेर या छेड़छाड़ की संभावना न के बराबर हो जाएगी। एक बार पोर्टल में आने के बाद इसमें किसी तरह का बदलाव भी नहीं हो सकेगा।