यूपी – राज्यसभा चुनाव: सपा-भाजपा ने नहीं उतारा तीसरा और 9वां प्रत्याशी; धनराज नाथवानी ने मोदी की तारीफ में पढ़े कसीदे – INA

सपा के राज्यसभा प्रत्याशी धनराज नाथवानी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की। यह प्रशंसा मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 साल पूरे होने पर की गई। नाथवानी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ”नेतृत्व के 25 साल, समर्पण के 25 साल, सेवा के संकल्प के 25 साल” लिखा।
उन्होंने कहा कि 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के बाद मोदी ने शानदार सफर तय किया। गुजरात की सेवा से भारत का नेतृत्व करने तक उनकी यात्रा उल्लेखनीय रही। बदलते समय और चुनौतियों के बावजूद, उनका विश्वास और राष्ट्र-निर्माण के प्रति समर्पण अटूट रहा।
नाथवानी ने जन-सेवा के 25 साल पूरे होने का जश्न मनाया। उन्होंने इस यात्रा को सेवा का संकल्प और राष्ट्रीय कर्तव्य से प्रेरित बताया। उन्होंने नरेंद्र मोदी को राष्ट्र सेवा में निरंतर शक्ति और सफलता की शुभकामनाएं दीं।
सपा ने तीसरा, भाजपा ने नौवां प्रत्याशी नहीं उतारा
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के चुनाव में भाजपा और समाजवादी पार्टी (सपा) ने अतिरिक्त प्रत्याशी न उतारकर क्रॉस वोटिंग के जोखिम से बचने की रणनीति अपनाई है। विधानसभा में मौजूदा संख्याबल के आधार पर भाजपा आठ और सपा दो सीटें आसानी से जीत सकती है। शुरुआत में सपा के तीसरे और भाजपा के नौवें प्रत्याशी को मैदान में उतारने के कयास थे, लेकिन दोनों दलों ने अंततः कदम पीछे खींच लिए।
सपा को तीसरी सीट जिताने के लिए करीब 10 से 11 अतिरिक्त विधायकों के वोट जुटाने पड़ते। पिछले राज्यसभा चुनाव में अपने विधायकों की बगावत और क्रॉस वोटिंग से सबक लेते हुए पार्टी ने जोखिम नहीं उठाया। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संभावित हार से कार्यकर्ताओं के मनोबल पर असर पड़ने की आशंका भी थी। भाजपा भी अतिरिक्त प्रत्याशी उतारकर जोखिम लेने के पक्ष में नहीं रही। टिकट कटने की चर्चाओं के बीच कुछ विधायकों के निष्ठा बदलने की आशंका को देखते हुए पार्टी ने सुरक्षित रणनीति अपनाई।
इस बीच सपा के चौंकाने वाले प्रत्याशी और रिलायंस समूह के प्रोफेशनल कंसल्टेंट धनराज नाथवानी को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा है। उनके पिता परिमल नाथवानी इसी वर्ष झारखंड से भाजपा समर्थित प्रत्याशी के रूप में राज्यसभा पहुंचे हैं। दोनों दलों की ओर से अतिरिक्त प्रत्याशी उतारने की चर्चा अंततः एक-दूसरे पर दबाव बनाने की रणनीति तक सीमित रही।