खबर शहर , Agra News: धरोहर बचाने के लिए कागज चला, कन्नी नहीं – INA

आगरा। यमुना के किनारे चीनी का रोजा के पास मौजूद स्मारक जोहरा बाग धीरे-धीरे बदहाल होता जा रहा है। स्मारक की तीन मंजिलें दो साल पहले बारिश में ढह गई थीं। मुगल काल की इस धरोहर को सहेजने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने दो सालों में सिर्फ कागजों पर काम किया। मरम्मत अब तक शुरू नहीं हुई है। पहले चरण के संरक्षण के लिए 60 लाख रुपये स्वीकृत हो चुके हैं।

अक्तूबर 2024 में बारिश के दौरान 500 साल पुराने जोहरा बाग का तीन चौथाई हिस्सा ढह गया था। लाल बलुआ पत्थर से बने स्मारक पर तब मलबा हटाकर उखड़े पत्थरों को मसाले से सेट कर दिया गया था। ढही तीनों मंजिलों को संरक्षित करने का काम अब तक शुरू नहीं हो सका है।

चीनी का रोजा से सामान पहुंचाने के लिए पाथवे बनाया गया था, जो बाढ़ के दौरान क्षतिग्रस्त हो गया। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पास गिरी हुई तीनों मंजिलों की तस्वीर के अलावा कोई ब्योरा मौजूद नहीं था। ऐसे में इसकी थ्री-डी स्कैनिंग कराई गई जिसमें काफी समय लगा है।

——————

ईरानी राजदूत का आतिशबाजी संग हुआ था स्वागत

ऑस्टि्रयाई इतिहासकार एब्बा कोच की पुस्तक रिवरफ्रंट गार्डंस ऑफ आगरा में दर्ज है कि शाहजहां ने इस बाग में मई 1638 में ईरानी राजदूत यादगार बेग का जोरदार स्वागत किया था। विदेशी मेहमान के साथ सैर के बाद शाम को आतिशबाजी कराई थी। राजकुमार के रूप में औरंगजेब वर्ष 1652 में अपनी बहन जहांआरा से मिलने जोहरा बाग में आए थे। वर्ष 1835 तक रामबाग से बेहतर स्थिति में जोहरा बाग था। मुगल राजकुमारी जहांआरा ने सबसे ऊपरी मंजिल पर मेहराबों के साथ छतरी को जोड़ा था।

——————–

हर शहंशाह की वास्तुकला का नमूना

पुरातत्वविद डॉ. आरके दीक्षित ने बताया कि बाबर से लेकर शाहजहां तक हर मुगल शहंशाह की वास्तुकला का नमूना जोहरा बाग में मौजूद था। यह आगरा में एकमात्र इमारत है जिसमें अगल-अलग काल की वास्तुकला नजर आती थी। इसका संरक्षण बेहद जरूरी है।

———————

– जोहरा बाग में छतरियों के अंदर की डिजाइन कैसी थी और किस तरह का निर्माण था, इसके लिए थ्री-डी स्कैनिंग कराई गई है। इसे फिर से सहेजने के लिए एक-एक डिजाइन चाहिए। पूरी तैयारी के बाद ही काम शुरू किया जाएगा। बजट स्वीकृत हो चुका है। – डॉ. स्मिता कुमार, अधीक्षण पुरातत्वविद


Credit By Amar Ujala

Back to top button