Entertainment: Bollywood Actors Debt: कर्ज में डूबे सितारे अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान से सीखें, हारी बाजी कैसे जीतते हैं? – #iNA

राजपाल यादव के मामले में फिल्म इंडस्ट्री के दो रूप देखने को मिल रहे हैं. जिस बॉलीवुड के इतिहास में परबीन बॉबी जैसे कई सितारों की गुमनाम मौतें और मीना कुमारी जैसे आर्थिक तंगी के कई दर्दनाक किस्से दर्ज हैं, वहां राजपाल यादव की मदद के लिए तमाम कलाकारों और फिल्म से जुड़ी संस्था का सामने आना प्रशंसनीय पहल कही जा सकती है. गुजरे दौर के भारत भूषण जैसे चमकते सितारे का किस्सा मालूम है? आखिरी दिनों में उन्हें सड़क पर फटेहाल भटकते देखा गया था. या कि सुपरस्टार अमिताभ बच्चन पर 90 करोड़ के कर्ज की वो नींद उड़ाने वाली कहानी याद है? उन्होंने किस कर्मठता से खुद को उबारा. आवारा और श्री420 जैसी फिल्में बनाने वाले बॉलीवुड के सबसे बड़े शोमैन राज कपूर भी कभी भारी कर्ज में डूबे थे. तो शाहरुख खान ऐसे एक्टर साबित हुए, जो बिलेनियर होकर भी कभी आर्थिक मामलों में नहीं फंसे. राजपाल यादव ऐसे पहले कलाकार नहीं, जिन्होंने कर्ज लिया या हालात के मुताबिक आर्थिक तंगी के शिकार जान पड़ते हैं.
फिल्म इंडस्ट्री ऐसा कामकाजी क्षेत्र है, जहां पैसों का लेन देन आम है. कला और प्रतिभा का अपना अर्थशास्त्र होता है. निर्माता-निर्देशक या अन्य कलाकार, अक्सर कभी बैंकों से तो कभी निजी कंपनियों से उधार या कर्ज लेते रहे हैं. इनमें कुछ अपने बिजनेस में सफल हो जाते हैं तो कुछ विफल. गीतकार शैलेंद्र और सिल्वर स्क्रीन के शहंशाह अमिताभ बच्चन से लेकर बादशाह शाहरुख खान तक बॉलीवुड के इतिहास में सभी तरह के नजीर हैं. वैसे राजपाल के कर्ज का मामला पिछले करीब पंद्रह साल से चल रहा था. जब कोर्ट के आदेश पर राजपाल को तिहाड़ जेल भेजा गया तो साथी कलाकार मदद के लिए आगे आए. इंडस्ट्री की इस खूबसूरत पहल का स्वागत किया जाना चाहिए. सोनू सूद से शुरुआत हुई ये पहल दिल जीतने वाली है.
इंडस्ट्री में बड़े बड़े कर्ज के कई उदाहरण
पूरे मामले में राजपाल यादव की हीला-हवाली पर भी सवाल उठे हैं, जिसके चलते ये मामला इतना लंबा खिंचा और पांच करोड़ का कर्ज ब्याज समेत नौ करोड़ तक पहुंच गया. बीच बहस में ये भी कहा जा रहा है कि राजपाल अगर गंभीरता से चाहते तो ये केस इतना लंबा नहीं खिंचता. मामला काफी पहले भी सुलझ सकता था. खैर, जो वक्त कमान से निकले तीर की तरह गुजर गया, उसे वापस तो नहीं लाया जा सकता लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि इसी फिल्म इंडस्ट्री में ऐसे भी उदाहरण हैं, जिनसे कर्ज लेने वाले या आर्थिक तंगी से गुजरने वाले कलाकार प्रेरणा ले सकते हैं.
राज कपूर ने पत्नी के गहने गिरवी रखे
बॉलीवुड के शोमैन राज कपूर का किस्सा सबसे पहले. सत्यम शिवम सुंदरम् और मेरा नाम जोकर जैसी शौकिया क्लासिक फिल्में बनाकर सबकुछ लुटा चुके राज कपूर पर भारी कर्ज चढ़ गया था. पत्नी के गहने गिरवी रख दिए गए थे. मकान और स्टूडियो के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा था. कोई उपाय नहीं सूझ रहा था. लेकिन वो राज कपूर थे. जितने बड़े कलाकार, निर्माता, निर्देशक उतने ही बड़े उद्यमी भी. हालात के आगे हार नहीं मानी. बॉबी की प्लानिंग की. उतने पैसे नहीं थे कि राजेश खन्ना जैसे सुपरस्टार को बतौर नायक रोल देते या डिंपल कपाड़िया के बदले किसी बड़ी हीरोइन को साइन करते. कम खर्चे में दोस्तों ने साथ दिया. प्राण ने महज एक रुपया लिया तो प्रेम चोपड़ा ने एक पैसा भी नहीं लिया. पैसे की कमी के चलते बेटे ऋषि कपूर को लॉन्च किया और नई हीरोइन डिंपल को साइन किया. उद्यमशीलता को वक्त ने भी साथ दिया और बॉबी की कामयाबी ने गर्दिश में डूबे उनके सितारे को फिर से चमका दिया.
90 करोड़ के कर्ज ने अमिताभ की नींद उड़ा दी थी
अब बताते हैं अमिताभ बच्चन की कहानी. जंजीर, दीवार से लेकर शराबी और खुदा गवाह तक उनका दौर वन मैन इंडस्ट्री वाला रहा है. ऐसे में किसे अनुमान था कि एबीसीएल कंपनी बनाकर कंगाल हो जाएंगे और 90 करोड़ का कर्ज चढ़ जाएगा. लेकिन वो अमिताभ बच्चन थे. अपनी फिल्मों में मार खाने के बाद खलनायक को पीटने वाला उनका किरदार मशहूर रहा है. अमिताभ कर्ज से मुरझा गए थे. लेकिन कर्मठता से मुंह नहीं मोड़ा था. मेहनत करने की इसी ललक का परिणाम था- केबीसी और इस शो की सफलता. जिस सितारा के लिए 70 एमएम का पर्दा भी छोटा पड़ जाता था, उसने कर्ज से उबरने के लिए छोटे पर्दे पर काम करना मंजूर किया. क्योंकि अमिताभ को कर्ज से मुक्ति पानी थी. घर को नीलाम होने से बचाना था.
केबीसी जैसे नए गेम शो को भी उन्होंने उसी शिद्दत से निभाया जैसे कभी जंजीर और दीवार के रोल किए. नतीजा- यह शो उनकी प्रोफेशनल लाइफ को पुनर्जीवन देने वाला साबित हुआ. अमिताभ के लिए केबीसी शो दिल का रिश्ता बन गया. पच्चीस साल से भी ज्यादा समय बीत गया लेकिन दिल के इस रिश्ते से कभी बोर नहीं हुए. दूसरे होते शायद उन्हें भी बोरियत हो जाती. केबीसी करने के साथ ही उन्होंने अपने पुराने दिनों के डायरेक्टर यश चोपड़ा से आगे बढ़ कर काम मांगा. झिझके नहीं. ना ही अहंकार रखा कि उन्हें काम का ऑफर मिलना चाहिए. इस प्रकार अमिताभ बच्चन अपनी व्यहारकुशलता, कर्मठता और अनुशासन से आज की तारीख में फिल्म इंडस्ट्री से सबसे बड़े टैक्स पेयर बने. समय समय की बात है. साल 2000 तक जिस कलाकार के सिर पर 90 करोड़ का कर्ज था, उन्होंने 2025 में 120 करोड़ का टैक्स भरा.
बादशाह खान के अर्थशास्त्र की कहानी
राज कपूर या अमिताभ बच्चन के बरअक्स बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान के अर्थशास्त्र की कहानी सबसे जुदा है. आर्थिक मामलों में शाहरुख सबसे अलग हैं. ना कर्ज, ना तंगी और ना आर्थिक धोखाधड़ी- कभी इनमें से किसी भी मामले में सुर्खियों में नहीं आए. जैसे राज कपूर या अमिताभ बच्चन कर्ज लेने वाले कलाकारों के लिए एक नजीर हैं, जिन्होंने मेहनत करके अपना कर्ज सही समय पर उतारा और कामयाबी का शिखर फिर से हासिल किया, उसी तरह शाहरुख भी एक उदाहरण हैं, जिन्होंने अपने जीवन में अभिनय और अर्थशास्त्र का संतुलन बनाए रखा. शाहरुख फिल्मों के सबसे व्यस्त अभिनेता रहे, उन्होंने भी रेड चिलीज एंटरटेंमेंट कंपनी बनाई, स्पोर्ट्स प्रमोशन के लिए केकेआर आईपीएल टीम के पार्टनर हैं, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मुंबई के अलावा दुबई और लंदन में प्रोपर्टीज हैं, कई ब्रांड्स के एम्बेसेडर रहे- कुल मिलाकर हर मोर्चे पर करोड़ों का कारोबार है. मीडिया रिपोर्ट्स कहती है- शाहरुख खान बिलेनियर क्लब शामिल हो चुके हैं.
भारत भूषण-मीना कुमारी जैसी कहानियों से अलर्ट
वास्तव में शाहरुख खान एक नजीर हैं, जो आर्ट और बिजनेस को समानांतर चलाने के लिए जाने जाते हैं. फिल्म की सफलता के साथ-साथ भविष्य की सुरक्षा के प्रति सचेष्ट रहना भी उतना ही चाहा. दरअसल गुजरे ज़माने के ऐसे कई कलाकार हुए जिन्होंने केवल अभिनय किया, यह नहीं सोचा कि अगर फिल्में नहीं चलीं या बुढ़ापे में आय के स्रोत नहीं रहेंगे तो दिन कैसे बीतेंगे. लेख की शुरुआत में ही भारत भूषण और मीना कुमारी का उदाहरण दिया गया था. भारत भूषण मुंबई में शानदार जिंदगी और आलीशान बंगले के मालिक थे, लेकिन प्लानिंग में संतुलन नहीं होने की वजह से दुर्दिन का सामना करना पड़ा. बंगले बिक गए, मुफलिसी ने घेर लिया. अंतिम दिनों में सड़कों पर भूखे फटेहाल भटकते देखे गए. इसी तरह से जिस मीना कुमारी की अदाकारी की दुनिया दीवानी थी, जिन्होंने खूब पैसे कमाए, पूरे परिवार और रिश्तेदारों की ख्वाहिशें पूरी कीं, उसी मीना कुमारी को आखिरी दिनों में इलाज के लिए पैसे नहीं थे.
अभिनय के साथ भविष्य के प्रति निवेश भी जरूरी
पुराने दौर के इन जैसे कलाकारों की हालत देखकर ही बहुत से कलाकारों ने शाहरुख खान की तरह भविष्य के प्रति सचेत रहना जरूरी समझा. और साइड बिजनेस में निवेश किए. आज सलमान खान, दीपिका पादुकोण, अक्षय कुमार, अनुपम खेर, रोनित रॉय, रोहित रॉय, सुनील शेट्टी, गुलशन ग्रोवर आदि अनेक कलाकार हैं, जो फिल्मों में अभिनय करने के साथ-साथ निवेश और व्यापार को लेकर भी उतने ही जागरुक हैं. इसी जागरुकता की कमी के चलते सनी देओल का जुहू स्थित बंगला बैंक के पास गिरवी रखा था, तो अमीषा पटेल, श्रेयस तलपड़े, जैकी श्रॉफ और राजपाल यादव को भी आर्थिक मामलों का सामना करना पड़ा.
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