नेपाल की बूढ़ी गंडकी नदी में बाढ़:कई पुल-घर बहे, 4 लापता; 45 दिन पहले आई बाढ़ में 1455 मौतें हुईं- INA NEWS

नेपाल के गोरखा जिले में रविवार सुबह बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक बाढ़ आने से कई गांवों को नुकसान पहुंचा है। बाढ़ में कई घर और पुल बह गए। चार लोग लापता हैं। उनकी तलाश की जा रही है। बाढ़ से 341 मेगावाट के बूढ़ी गंडकी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का निर्माण कैंप और कुछ उपकरण भी बह गए। बाढ़ का पानी सुबह करीब 4 बजे बस्तियों में घुसा, जिसके बाद लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ा। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, ऊंचे पहाड़ी इलाके में भूस्खलन के कारण चुन्चुब्री स्यार नदी का रास्ता बंद हो गया था। इससे पानी जमा हुआ और फिर अचानक तेज बहाव के साथ नीचे आया। रॉयटर्स के मुताबिक, 26 अगस्त को भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आई बाढ़ में 1455 लोगों की मौत हुई थी। साथ ही 5,285 लोग अब भी लापता हैं। सरकार ने बताया कि लगातार हो रहे भुस्खलन के बीच लापता लोगों की तलाश जारी है। बाढ़ से जुड़ी तस्वीरें… SMS भेजकर लोगों को सुरक्षित जगह जाने की सलाह गोरखा जिला पुलिस कार्यालय के इंस्पेक्टर आकाश कंडेल ने बताया कि बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने सिरदिबास और धारचे ग्रामीण नगरपालिका के खोर्लाबेसी, माछाखोला, सोती, अरखेत और आरुघाट में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने की सलाह दी। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के मुख्य कार्यकारी डॉ. धर्मराज उप्रेती ने बताया कि ऊपरी इलाके से बाढ़ का पानी आरुघाट पहुंचने में करीब 3 घंटे लगते हैं। इससे नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने का समय मिल सकता है। उप्रेती के मुताबिक, प्रशासन ने लोगों को SMS भेजकर अलर्ट किया है। सिरदिबास, जगत, यारी, तातोपानी, सोती और अरुखोला जैसे नदी किनारे बसे इलाकों के लोगों को खास सावधानी बरतने को कहा गया है। पहाड़ी इलाकों में बिना बारिश के भी बाढ़ का खतरा नेपाल के पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन के कारण अचानक बाढ़ आने का खतरा बना रहता है। पहाड़ से मिट्टी और पत्थर खिसककर जब नदी या नाले का रास्ता रोक देते हैं, तो पानी एक जगह जमा होने लगता है। कुछ समय बाद जब मिट्टी और पत्थरों की रुकावट टूटती है, तो जमा पानी तेजी से नीचे की ओर बहने लगता है। इससे नदी के किनारे बसे गांवों में अचानक बाढ़ आ जाती है। पानी का बहाव इतना तेज होता है कि अपने साथ बड़े पत्थर, पेड़ और मलबा भी बहाकर ले जाता है। इससे घर, सड़कें और पुल टूट सकते हैं। कई बार लोगों को संभलने और सुरक्षित जगह जाने का मौका भी नहीं मिलता। ऐसी बाढ़ आने के लिए यह जरूरी नहीं है कि उसी इलाके में बारिश हुई हो। पहाड़ के ऊपरी हिस्से में जमा पानी अचानक नीचे आने से दूर बसे गांवों में भी तबाही मच सकती है।
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