हर्षोउल्लास के मनाया गया मकर संक्रांति पर्व, नदी घाटों पर उमडा श्रद्धालुओं का सैलाब

🔵जगह-जगह आयोजित किया गया खिचड़ी भोज

🔴 हर हर गंगे के जय से गुंजायमान  हुआ नदी घाट

कुशीनगर ।स्नान-दान का पावन पर्व मकर संक्रान्ति मंगलवार को श्रद्धा के साथ हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। बादल और शीतभरी हवा के बावजूद लोगों ने हर हर गंगे के जयघोष से स्नान कर नया वस्त्र धारण किया। अन्नदान करने के बाद लाई, चूरा, रेवड़ा, तिलवा, मिठाई का सेवन किया। जगह – जगह खिचडी भोज का आयोजन किया गया। बच्चे सुबह से ही रंग बिरंगे कपड़े पहन कर छत और खुले मैदान में पतंग उड़ाने में मशगूल हो गए हैं। जनपद के बासी घाट, शिवाघाट, नारायणी नदी, हेतिमपुर छोटी गण्डक नदी, रगडगंज, समेत अन्य घाटों पर लोगों ने स्नान किया। नारायणी घाट, शिवाघाट व बासी घाट पर पुरोहित ने स्नानार्थियों को संकल्प दिला कर पूजा पाठ कराया। मकर संक्रान्ति के दिन दोपहर में चावल, दाल मिश्रित खिचड़ी खाने की मान्यता है। जिसके नाते घर घर खिचड़ी बनाई गई। रात में पूड़ी, कचौड़ी, खीर आदि का लोग सेवन करेंगे। पर्व को लेकर बच्चों में खासा उत्साह रहा। आज भी बहुत से लोगों ने बहू बेटियों को खिचड़ी भेजने की परम्परा को कायम रखा। सड़कों पर बाइक, साइकिल पर लोग बोरियों में खिचड़ी का सामान लेकर जाते देखे गए। जगह जगह पतंगबाजी होती रही।

🔴 देवी-देवताओं को खिचडी चढाने की है प्राचीन परम्परा

मकर संक्रांति भारतीय परंपरा और संस्कृति का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे हर वर्ष 14 अथवा 15 जनवरी को मनाया जाता है। इस दिन सूर्य देवता मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जो इस पर्व को विशेष महत्व प्रदान करता है। इस पर्व को लोग बड़े उत्साह और उल्लास के साथ मनाते हैं। मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाने और देवी-देवताओं को इसका भोग अर्पित करने की प्राचीन परंपरा है। यह शुभ माना जाता है और इससे जीवन में सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। 

🔴 सूर्यदेव को खिचड़ी का भोग

हिंदू धर्म में सूर्यदेव को प्रत्यक्ष देवता और सौर मंडल का अधिपति माना गया है। वह सभी ग्रहों के स्वामी होते हैं और उनकी कृपा से जीवन में खुशहाली और समृद्धि आती है। मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन सूर्यदेव को खिचड़ी का भोग अर्पित करने से जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है और जीवन की कठिनाइयों का समाधान होता है। खासकर जिनकी कुंडली में सूर्य कमजोर होता है, उनके लिए यह उपाय अत्यधिक लाभकारी हो सकता है।

🔴 शनिदेव को खिचड़ी का भोग

शनिदेव को कर्म और न्याय के देवता माना जाता है। वे व्यक्ति के अच्छे और बुरे कर्मों के आधार पर फल प्रदान करते हैं। मकर संक्रांति पर शनिदेव को खिचड़ी का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। यह माना जाता है कि ऐसा करने से शनिदेव के अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। इस दिन शनिदेव की विशेष पूजा करने से आर्थिक स्थिति में सुधार और खुशहाली का अनुभव होता है।

🔴भगवान विष्णु को खिचड़ी का भोग

भगवान विष्णु को खिचड़ी का भोग अर्पित करना भी शुभ माना जाता है। किवदंती है कि भगवान विष्णु को खिचडी अत्यंत प्रिय है। इस दिन उन्हें खिचड़ी अर्पित करने से उनके आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, यह भी माना जाता है कि इस उपाय से व्यक्ति को गुरुदोष से मुक्ति मिलती है और जीवन में समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।मकर संक्रांति पर इन देवी-देवताओं को खिचड़ी का भोग अर्पित करना न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मानसिक और आध्यात्मिक शांति का भी स्रोत है।

🔴पत्रकार संयोग ने किया कबल वितरण 

मकर संक्रांति पर जिले में गरीबों को कंबल वितरण, खिचड़ी भोज और भंडारों का आयोजन दिनभर चलता रहा। कंबल वितरण कार्यक्रम में लोगों की भीड़ दिखी। जनपद के तरया सुजान थाना क्षेत्र तरया लच्छीराम गांव के निवासी व पत्रकार संयोग श्रीवास्तव ने गरीब व निराश्रित लोगो को कंबल भेट किया।  उन्होंने कहा कि गरीब और निराश्रित लोगो की हर संभव मदद करना वह अपने पिता स्व. डाँ. बृजेश चंद श्रीवास्तव से सीखे है। उन्होंने कहा पिताजी हमेशा दीन-दुखियो की सेवा और मदत करते थे उनके पदचिन्हो पर चलने का हम प्रयास कर रहे है।

🔵 रिपोर्ट – संजय चाणक्य 

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