देश- 3 दशक बाद चुनावी मैदान में जमात-ए-इस्लामी, कुलगाम में किया शक्ति प्रदर्शन- #NA

कुलगाम में जमात-ए-इस्लामी की रैली

जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव होने जा रहा है. जिसमें प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनाव लड़ने जा रहे हैं. इसी के तहत दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के बुगाम इलाके में जमात-ए-इस्लामी ने विशाल रैली का आयोजन किया, जहां उसके उम्मीदवारों ने कश्मीर, कश्मीरियों और राजनीतिक कैदियों के बारे में बात करने का वादा किया. इसके साथ ही संगठन ने कश्मीरी पंडितों की घर वापसी के साथ-साथ उनकी सुरक्षा का भी भरोसा दिया.

1987 के बाद पहली बार बुगाम इलाके में आयोजित इस रैली में हजारों लोग शामिल हुए. प्रतिबंधित होने के चलते पिछले तीन दशकों में जम्मू-कश्मीर में हुए चुनाव में जमात ए इस्लामी चुनाव से दूर रहा. दशकों के बाद वो चुनाव में हिस्सा ले रहा है. रैली के जरिए उसने अपनी शक्ति प्रदर्शन किया. इस दौरान रैली में लोग काफी उत्साहित नजर आए और उन्होंने जमकर नारेबाजी की.

‘लोगों की भीड़ हमारी ताकत’

शक्त प्रदर्शन के दौरान जेईआई उम्मीदवार सयार अहमद रेशी ने कहा कि राज्य में जो क्षेत्रीय राजनीतिक दलों द्वारा खालीपन पैदा किया गया है उसे भरने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि ‘हमारे खिलाफ उंगलियां उठाई जाएंगी और हमारी आलोचना भी की जाएगी लेकिन जो भीड़ जुटी है वो हमारी ताकत है और यही सच्चाई है.

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‘कश्मीर के लोगों की सेवा करेंगे’

वहीं एक अन्य उम्मीदवार एजाज मीर ने कहा कि अगर वो चुनाव जीतते हैं तो वो बिना किसी समझौते के कश्मीर के लोगों की सेवा करेंगे. उन्होंने कहा कि ‘हम भ्रष्टाचार को बढ़ावा नहीं देंगे. हम पारदर्शी तरीके से काम करेंगे. हम कश्मीर और कश्मीरियों के बारे में बात करेंगे. हम विधानसभा में लोगों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करेंगे’.

जमात-ए-इस्लामी पर लगा है बैन

दरअसल जेईआई द्वारा खड़े किए गए उम्मीदवार इस उम्मीद के साथ निर्दलीय रूप से चुनाव लड़ रहे हैं कि अगर वो चुने जाते हैं, तो वो जेईआई पर लगे प्रतिबंध को हटाने के लिए लड़ेंगे. इस साल फरवरी में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) 1967 के तहत जमात-ए-इस्लामी (जेईआई) पर लगे प्रतिबंध को अगले पांच सालों के लिए बढ़ा दिया. जेईआई को पहली बार 28 फरवरी 2019 में गृह मंत्रालय द्वारा “गैरकानूनी संघ” घोषित किया गया था.

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