देश- PM मोदी का बंजारा समाज के मंदिर का दौरा और संग्रहालय के उद्घाटन के पीछे के राजनीतिक कारण!- #NA
पीएम नरेंद्र मोदी
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की घोषणा से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज (5 अक्टूबर) महाराष्ट्र का दौरा करेंगे. इस दौरान सबसे पहले पीएम मोदी वाशिम जाएंगे और सुबह करीब 11:15 बजे पोहरादेवी स्थित जगदंबा माता मंदिर में दर्शन करेंगे. उसके बाद प्रधानमंत्री मोदी वहीं वाशिम में संत सेवालाल महाराज और संत रामराव महाराज की समाधि पर भी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे.
बंजारा समाज के संत रामराव महाराज ने पोहरादेवी जगदम्बा माता मंदिर भक्तिधाम की स्थापना की थी. अंत में प्रधानमंत्री बंजारा समुदाय की समृद्ध बंजारा विरासत पर आधारित एक संग्रहालय का उद्घाटन करेंगे. अब सवाल उठता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पोहरादेवी के बंजारा भक्तिपिठ में दर्शन, बंजारा संत रामराव और सेवालाल को श्रद्धांजलि और बंजारा विरासत पर संग्रहालय के उद्घाटन का राजनीतिक दृष्टि से महत्व क्या है?
महाराष्ट्र की राजनीति में बंजारा समाज की अहम भूमिका
वोट के दृष्टि से महाराष्ट्र की राजनीति में बंजारा समाज की अहम भूमिका है. एक जमाने में घुमंतू माने जाने वाले इस समाज की महाराष्ट्र की राजनीति में आज अहमियत बढ़ चुकी है. आंकड़े के मुताबिक महाराष्ट्र में बंजारों की आबादी कुल आबादी का लगभग 6 प्रतिशत है. महाराष्ट्र में लगभग 1.30 करोड़ आबादी वाले बंजारा समाज अनुसूचित जनजाति वर्ग में आते हैं.
बंजारा समाज से दो मुख्यमंत्री
महाराष्ट्र में राजनीतिक शक्ति के रूप में हमेशा इस समाज की गिनती होती रही है. इसी समाज से सूबे के दो मुख्यमंत्री बसंत राव नाइक और सुधाकर राव नाइक थे. महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री बसंत राव नाइक और सुधाकर राव नाइक रिश्ते में दोनों चाचा भतीजे थे.
आबादी 10 करोड़ से अधिक
वैसे पूरे देश में बंजारा समाज के सभी हिंदू गोर बंजारा व लबाना, नायकड़ा समाज को मिलाकर गणना करें तो इनकी आबादी 10 करोड़ से अधिक है. महाराष्ट्र के अलावा इनकी आबादी राजस्थान, तेलंगाना, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़ और गोवा में पाई जाती है.
कन्वर्जन को रोकने की कोशिश
गौरतलब है कि पिछले साल जनवरी में आरएसएस ने महाराष्ट्र के जलगांव जिले के गोद्री में बंजारा महाकुंभ आयोजित करवाया था. अपने आप में बिल्कुल नायाब 6 दिनों के इस बंजारा महाकुंभ को आरएसएस ने बंजारा समुदाय में तेजी से हो रहे कन्वर्जन को रोकने के उद्देश्य से करवाया था. इस कुम्भ के जरिए बंजारा समुदाय के ईसाईकरण को रोकने और सभी बंजारा, लबानाव नायकड़ा समुदाय को एकजुट करने के लिए आयोजित किया गया था. इस महाकुंभ को संघ के पूर्व सरकार्यवाह भैयाजी जोशी के नेतृत्व में आयोजित किया गया था.
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